जब टिना दाबी ने 2015 के यूपीएससी परीक्षा में एलआईए रैंक 1 हासिल किया, तो देश ने उन्हें एक नए नाम से पहचाना — सिर्फ एक आईएएस अधिकारी नहीं, बल्कि एक ऐसी आवाज जो गरीबी, सूखा और लिंग असमानता के खिलाफ शांति से लड़ती है। अब, उनकी मेहनत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 18 नवंबर, 2025 को राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोहविग्नान भवन, नई दिल्ली में बाड़मेर जिला के जल संरक्षण कार्य के लिए जल संचय जन भागीदारी पुरस्कार और 2 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार दिया। ये सिर्फ एक पुरस्कार नहीं — ये एक बदलाव का प्रतीक है।
बाड़मेर में बारिश को जमा करने की कहानी
बाड़मेर, राजस्थान का एक ऐसा जिला जहां पिछले दशकों में बारिश का पानी जमीन में समा जाता था, और गांवों को सिर्फ एक महीने तक पीने का पानी मिलता था। टिना दाबी ने इसे बदलने का फैसला किया। उन्होंने 'कैच द रेन' अभियान शुरू किया — एक ऐसा अभियान जो नए तकनीकी उपायों से नहीं, बल्कि पुराने तरीकों को नवीनीकृत करके काम करता है। गांवों में बड़े-बड़े जलाशय बनाए गए, जिनमें बारिश के बाद पानी जमा होने लगा। एक खास तकनीक — रेत के माध्यम से पानी निकालने की — इस अभियान की राज बन गई। अब, गांवों में बारिश के बाद पानी तीन से चार महीने तक उपलब्ध है। लोगों के चेहरे पर अब चिंता की जगह आशा है।
एक औरत, दो जिले, एक इतिहास
टिना दाबी का रास्ता आसान नहीं था। 2022 में वे जैसलमेर की पहली महिला जिला कलेक्टर बनीं। उन्होंने वहां रामदेवरा में 638वां रामदेवरा मेला भी शुरू किया, जहां लाखों श्रद्धालु आए। 20 जुलाई, 2023 को उन्होंने मातृत्व छुट्टी के लिए अपना पद छोड़ा — और एक भावुक नोट में लिखा, "मैं वापस आऊंगी, क्योंकि मेरा काम अधूरा है।" और वे वापस आईं। इस बार बाड़मेर में। उनके पति प्रदीप के. गवांडे, जो 2013 के आईएएस ऑफिसर हैं, उन्हें जालोर का कलेक्टर बनाया गया। दोनों एक ही राज्य में, दो अलग-अलग जिलों में — एक ऐसा दुर्लभ नमूना जहां प्रशासन और पारिवारिक जिम्मेदारी एक साथ चल रही है।
बहनों का ऐतिहासिक जोड़ा
ये कहानी सिर्फ टिना की नहीं है। उनकी बहन रिया दाबी, जो उदयपुर जिला परिषद की सीईओ हैं, ने उदयपुर के लिए जल संरक्षण के कार्य के लिए 1 करोड़ रुपये का पुरस्कार प्राप्त किया। जब उदयपुर के कलेक्टर नामित मेहता बीमार थे, तो रिया ने उनकी जगह ली। ये दोनों बहनें — एक जिला कलेक्टर, एक जिला परिषद की सीईओ — एक ही राज्य में राष्ट्रीय पुरस्कार जीत रही हैं। ये कोई साधारण घटना नहीं। ये एक संदेश है: जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो पानी बहता है — न केवल नहरों में, बल्कि समाज के रक्त में भी।
एक आईएएस अधिकारी की यात्रा
टिना दाबी की शुरुआत 2015 में हुई, जब वे यूपीएससी में टॉप करने वाली पहली दलित महिला बनीं। उन्होंने अजमेर में सहायक कलेक्टर के रूप में काम किया, जयपुर में रोजगार गारंटी योजना के कमिश्नर बने, और श्री गंगानगर में जिला परिषद की सीईओ बनीं। उनकी पहली शादी 2018 में यूपीएससी रैंक 2 वाले अथार आमिर खान से हुई, लेकिन 2021 में तलाक हो गया। अब, वे 2022 में शादी कर चुकी हैं प्रदीप के. गवांडे से, जो जयपुर में पुरातत्व विभाग के डायरेक्टर थे। उनका बेटा सितंबर 2023 में पैदा हुआ। इस सब के बीच, उन्होंने फेक सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की — ताकि उनकी पहचान और काम की निष्पक्षता बनी रहे।
प्रशासन में बदलाव का लहर
राजस्थान सरकार ने 108 आईएएस अधिकारियों के स्थानांतरण का फैसला किया। इसमें जयपुर, जैसलमेर, बूंदी, धौलपुर, डोंगरपुर, कोटा और अलवर जिलों के कलेक्टर बदले गए। टिना दाबी को बाड़मेर भेजा गया, जबकि उनके पति जालोर गए। ये सिर्फ एक ब्यूरोक्रेटिक शफ्ल नहीं — ये एक रणनीति थी। राज्य सरकार ने जल संरक्षण, स्वास्थ्य और शहरी विकास के क्षेत्रों में नए नेतृत्व की ओर झुकाव दिखाया। और टिना दाबी का नाम इस बदलाव के बीच सबसे चमकता हुआ था।
एक वीडियो जिसने देश बदल दिया
एक वीडियो जो वायरल हुआ — बाड़मेर में एक सरपंच, सोनू कनवार, जो अपनी फ्लूएंट अंग्रेजी में भाषण दे रही थीं। टिना दाबी उसके बीच खड़ी थीं, हाथ ताली बजा रही थीं। उस वीडियो ने देश को झकझोर दिया। एक गांव की सरपंच, एक आईएएस अधिकारी — दोनों महिलाएं, दोनों नेतृत्व कर रही थीं। इस वीडियो ने सिर्फ एक निशान नहीं बनाया, बल्कि एक नए विचार को जन्म दिया: नेतृत्व का लिंग नहीं, बल्कि निष्ठा होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
टिना दाबी का जल संरक्षण मॉडल क्या अलग है?
टिना दाबी का मॉडल पारंपरिक जल भंडारण तकनीकों को आधुनिक विश्लेषण के साथ जोड़ता है। उन्होंने रेत के माध्यम से पानी निकालने की तकनीक को बाड़मेर के रेगिस्तानी भूमि के अनुकूल ढाला। इससे बारिश का पानी जमीन में घुलने के बजाय धीरे-धीरे निकलता है, जिससे तीन-चार महीने तक पानी उपलब्ध रहता है। इसकी लागत बहुत कम है और गांवों के लोग इसे खुद बना सकते हैं।
क्या टिना दाबी के काम से बाड़मेर में जल अभियान का विस्तार हुआ?
हां, जिले के 156 गांवों में 387 जल भंडारण संरचनाएं बनाई गईं, जिनमें से 89% गांवों में पानी की कमी 70% तक कम हुई। राज्य सरकार ने इस मॉडल को अजमेर, जोधपुर और बीकानेर में भी अपनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए 2026 में राज्य बजट में 120 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
रिया दाबी और टिना दाबी के पुरस्कार का एक साथ मिलना क्यों महत्वपूर्ण है?
यह भारत में पहली बार है जब एक परिवार की दोनों बहनें एक ही राष्ट्रीय पुरस्कार परिप्रेक्ष्य में जल संरक्षण के लिए सम्मानित हुईं। यह सिर्फ पारिवारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक सामाजिक संकेत है कि महिलाएं न केवल अपने घरों में, बल्कि प्रशासन के शीर्ष पर भी बदलाव ला सकती हैं।
2025 के राष्ट्रीय जल पुरस्कार का विशेष महत्व क्या है?
यह पहली बार है जब एक आईएएस अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से 2 करोड़ रुपये का पुरस्कार दिया गया। यह राष्ट्रीय स्तर पर निजी प्रयासों के महत्व को मान्यता देता है। इससे पहले पुरस्कार संस्थानों या जिलों को ही दिए जाते थे। इस बदलाव ने अधिकारियों को निजी जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित किया है।
टिना दाबी के बाद आईएएस अधिकारियों के लिए क्या उम्मीद है?
अब आईएएस अधिकारियों के लिए केवल बजट बढ़ाना या नियम बनाना काफी नहीं है। उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं को सुलझाने की जिम्मेदारी है। टिना दाबी ने दिखाया कि एक अच्छा अधिकारी वही होता है जो बारिश के पानी को बचा ले, और उसे गरीब गांव के घर तक पहुंचा दे।
क्या टिना दाबी भविष्य में राज्य सरकार के शीर्ष पद पर आ सकती हैं?
हां, यह अत्यंत संभावित है। उनके काम की प्रशंसा केंद्रीय सरकार और विश्व बैंक दोनों ने की है। उन्हें अब राज्य सरकार के जल संसाधन विभाग के मुख्य सलाहकार के रूप में भी देखा जा रहा है। अगर वे अपने वर्तमान कार्यक्रम को आगे बढ़ाती रहीं, तो अगले 5 वर्षों में वे राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव बन सकती हैं।