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विश्व शांति दिवस के अवसर पर आयोजित हुआ कार्यक्रम

विश्व शांति दिवस के अवसर पर आयोजित हुआ कार्यक्रम
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Publish Date:21 September 2017 07:00 PM

गोण्डा। विश्व शांति दिवस सभी देशों और लोगों के बीच स्वतंत्रता, शांति और खुशी का एक आदर्श माना जाता है। विश्व शांति दिवस मुख्य रूप से पूरी पृथ्वी पर शांति और अहिंसा स्थापित करने के लिए मनाया जाता है। शांति सभी को प्यारी होती है। इसकी खोज में मनुष्य अपना अधिकांश जीवन न्यौछावर कर देता है। किंतु यह काफी निराशाजनक है कि आज इंसान दिन-प्रतिदिन इस शांति से दूर होता जा रहा है। आज चारों तरफ फैले बाजारवाद ने शांति को व्यक्ति से और भी दूर कर दिया है। यह विचार जिलाधिकारी जेबी सिंह ने नारी ज्ञान स्थली महाविद्यालय में विश्व शांन्ति दिवस के अवसर पर विश्व शांति सेना संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि अपने सम्बोधन में व्यक्त किए। उन्होने कहा कि संघर्ष और अशांति के इस दौर में अमन की अहमियत का प्रचार-प्रसार करना बेहद जरूरी और प्रासंगिक हो गया है। इसलिए संयुक्त राष्ट्रसंघ, उसकी तमाम संस्थाएँ, गैर-सरकारी संगठन, सिविल सोसायटी और राष्ट्रीय सरकारें प्रतिवर्ष 21 सितम्बर को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस का आयोजन करती हैं। शांति का संदेश दुनिया के कोने-कोने में पहुँचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने कला, साहित्य, सिनेमा, संगीत और खेल जगत की विश्वविख्यात हस्तियों को शांतिदूत भी नियुक्त कर रखा है। उन्होने कहा कि आज के दौर में भारत सहित तमाम देश अशांति से जूझ रहे हैं। शांति स्थापना के लिए किसी बन्द कमरे में अपने को अकेला महसूस करना शांति का द्योतक नहीं है, बल्कि इसे गली, मुहल्ले और राज्य और राष्ट्र पर फैलाना होगा। इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक हृदयेश कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा शांति को अध्यात्म से जोड़ा और कहा कि कोई भी धर्म हमें गलत रास्ते पर चलने की प्रेरणा नहीं नही देते हैं। सभी धर्म शांति, सदमार्ग पर ही चलने को कहते हैं भले ही उनके रास्ते जुदा-जुदा हों परन्तु सभी धर्मों के संदेश एवं मन्जिल एक ही है अपासी सौहादई और भाई चारा ही हैं। इस अवसर पर विश्व शांति के अध्यक्ष सुरेश मिश्र ने कहा कि पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने विश्व में शांति और अमन स्थापित करने के लिए पाँच मूल मंत्र दिए थे, इन्हें पंचशील के सिद्धांत भी कहा जाता है। यह पंचसूत्र, जिसे पंचशील भी कहते हैं, मानव कल्याण तथा विश्व शांति के आदर्शों की स्थापना के लिए विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक व्यवस्था वाले देशों में पारस्परिक सहयोग के पाँच आधारभूत सिद्धांत हैं। उन्होने कहा कि आज कई लोगों का मानना है कि विश्व शांति को सबसे बड़ा खतरा साम्राज्यवादी आर्थिक और राजनीतिक चाल से है। विकसित देश युद्ध की स्थिति उत्पन्न करते हैं, ताकि उनके सैन्य साजो-समान बिक सकें। यह एक ऐसा कड़वा सच है, जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता। आज सैन्य साजो-सामान उद्योग विश्व में बड़े उद्योग के तौर पर उभरा है। आतंकवाद को अलग-अलग स्तर पर फैलाकर विकसित देश इससे निपटने के हथियार बेचते हैं और इसके जरिये अकूत संपत्ति जमा करते हैं। उन्होने धोषणा करते हुए कहा कि उनकी संस्था द्वारा जनपद की प्रतयेकद ग्राम पंचायतों में तीस सदस्यी कमेटी का गठन किया जाएगा जिसमें सभी धर्मों के लोगों को शामिल किया जाएगा। एनजीएम की प्रबन्धक डा0 कृृष्णा सिन्हा ने कहा कि आज प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना होगा कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। मानव कल्याण की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। भाषा, संस्कृति, पहनावे भिन्न-भिन्न हो सकते हैं, लेकिन विश्व के कल्याण का मार्ग एक ही है। मनुष्य को नफरत का मार्ग छोड़कर प्रेम के मार्ग पर चलना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान शिक्षिका, आभा सक्सेना, दीप्ति द्विवेदी, रंजनाबन्धु, गीता श्रीवास्तव, नीतू सिंह, छात्रा शुभ्रा मिश्र सहित तमाम छात्राएं उपस्थित रहीं।
 

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