Breaking News New
  • भाजपा को समाज में शांति और भाईचारे को बनाए रखने की चिंता नहीं है: राहुल गांधी
  • मोदी सरकार से तेदपा के अलग होने का फैसला सही: चंद्रबाबू नायडू
  • भाजपा ने शीला दीक्षित को किया सम्मानित, बोलीं- डर था कहीं कांग्रेस डांटे न
  • जहां नारी का अनादर वहां धरती ज्यादा समय तक सुरक्षित नहीं: योगी
  • CM योगी: डूबते को तिनके का सहारा, लेकिन बचाने वाला कमजोर तो दोनों का डूबना तय

पांचवी बार धधकते अंगारों के बीच होकर निकला बाबूलाल पंडा

Share
Whatsapp
Publish Date:04 March 2018 09:52 AM
मथुरा- कोसीकला के फ़ालेन गांव में पांचवी बार धधकते अंगारों के बीच होकर निकला बाबूलाल पंडा. कई दशकों से चली आ रही है परंपरा, 40 दिन के कठोर तप के बाद प्रहलाद कुंड में स्नान करके होली के दिन शुभ मुहूर्त में धधकते अंगारों के बीच होकर निकलता है बाबूलाल पंडा .जैसे ही शुभ मुहूर्त आया बाबूलाल पंडा हरिनाम गुनगुनाते हुए धधकते अंगारों के बीच से निकल गया वह कुछ सेकेंडों के पल देखकर आप हैरत में पड़ जाएंगे. इतनी विशाल और धधकते अंगारों के बीच होकर बाबूलाल पंडा निकलता है लेकिन खास बात यह है कि उसको खरोंच तक नहीं आती. आपको बतादे कोसी कला क्षेत्र फालेन गांव मे दशको से चली आ रही परम्परा आज भी कायम है होली के दिन धधकती आग के शोलो के बीच से निकलता है बाबू लाल पांडा जिसको देखने के लिए लाखो की तदात मे भीड उमडती है। बता दे कि जिला मुख्यालय से पचास किलो मीटर दूर फालेन गांव मे पच्चीस फीट ऊँची होलिका रखी जाती है होली के दिन जिस दिन होलिका का दहन किया जाता है उसी दिन अंगारो के बीच से बाबू लाल पांडा आग से निकलता है .अबकी बार बाबूलाल पंडा पांचवी बार धधकते अंगारों के बीच होकर निकला .और बाबू लाल को खरौच तक आई .बाबू लाल आग के बीच से निकलने के लिए चालीस दिन की घोर तपस्या करता है चालीस दिनो तक बाबू लाल व्रत रखता है होली के दिन शुभ महुर्त के साथ ही पास मे बने पहलाद कुंड मे स्नान करके होलिका का धधकती आग के अंगारो से पांडा निकलता है जिसे देखने के लिए लोगो का सैलाब उमडता है बता दे कि बाबू लाल से पहले शीरी चरण और उससे पहले उन्ही के परिवार मे से ही यह परम्परा चली आ रही है। जिला प्रशासन भी इस मेले को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये जाते है क्योकि लोगो की भीड लाखो मे होती है.

संबंधित ख़बरें