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Ganesh Chaturthi 2018: शत्रुओं से मुक्ति दिलाएंगे भगवान गणेश, ऐसे करें इनकी पूजा

 Ganesh Chaturthi 2018: शत्रुओं से मुक्ति दिलाएंगे भगवान गणेश, ऐसे करें इनकी पूजा
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Publish Date:13 September 2018 10:21 AM

यूं तो गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणपति की पूजा करने से सर्वार्थ सिद्ध होते हैं लेकिन इस बार 13 सितम्बर को पड़ने वाली गणेश चतुर्थी का महत्त्व कुछ हटकर ही है। इस चतुर्थी पर भगवान गणेश विघ्नहर्ता के रूप में भक्तों को रोगों और शत्रुओं से मुक्ति दिलाएंगे। भगवान गणेश इस चतुर्थी पर प्रत्यक्ष और परोक्ष शत्रुओं से भक्तों की रक्षा करेंगे। यह पर्व उन लोगों के लिए है खास जो पूरे साल शत्रु दोष से पेरशान थे फिर चाहे वह प्रत्यक्ष शत्रु हो या फिर रोग रुपी परोक्ष शत्रु।
इस दिन भगवान गणेश को पीले वस्त्र धारण करवाकर यदि उन्हें दूर्वा एवं गुड़ अर्पण किया जाए तो सभी शत्रु बाधाएं दूर सकतीं हैं। मंगल भवन के आचार्य श्री भास्कर अमेटा जी के अनुसार भगवान गणपति थोड़ी भी आस्था रखने पर अपने भक्तों से खुश हो जाते है और उनको सभी रोगों, दोषों एवं बाधाओं से मुक्त कर देते हैं।
तो इस 13 सितम्बर यानी भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश की प्रतिमा को अपने घर मे स्थापित करें और उन्हें पीले वस्त्रों से सजाएं। इसके बाद गणेश जी को दूर्वा और गुड़ अर्पण करें। दूर्वा हरियाली और खुशहाली का प्रतीक है जबकि गुड़ से मिठास आती है।इसलिए जीवन में खुशहाली और मिठास लाने के लिए गणेश जी पर दुर्वा और गुड़ अर्पण करने से व्यक्ति को शत्रु दोष से छुटकारा मिलता है और जीवन में मिठास घुल जाती है।
भगवान गणपति को विघ्न हर्ता ऐसे ही नहीं कहा जाता है, इनकी पूजा करने से सभी विघ्न एंव बाधाऐं दूर हो जाती है। इसके लिए भक्तों को चाहिए कि भगवान गणेश की पूजा के लिए उचित सामग्री जैसे रोली/ सिंदूर, अक्षत, कलावा, दूर्वा, गुड़, धूपबत्ती, अगरबत्ती और गेंदे के फूल पूजा की थाली में सजा लें।
हालांकि मंगल भवन डॉट इन इस पर्व के लिए पूजा की थाली ऑनलाइन भी उपलब्ध करवा रहा है जिसे भक्तगण ऑनलाइन आर्डर कर सकते हैं। अगर बात करें शुभ महूर्त की, तो तृतीय की रात्रि और चतुर्थी का सूर्योदय बिल्कुल सही समय है भगवान गणपति की पूजा करने का, इस समय विधि अनुसार पूजा करने से भक्तों की सभी विघ्न एंव बाधाऐं दूर हो जाएंगी।
कुछ लोग भगवान की पूजा अपनी पूरी आस्था से करते है, लेकिन पूर्ण समाग्री ना होने के कारण उस पूजा का पूरा फल लोगों को नहीं मिल पाता है, यह मानना है मंगल भवन डॉट इन के निदेशक अमित जैन का।
इसी परेशानी को दूर करने के उद्देश्य से मंगल भवन गणेश पूजा की पूरी थाली लोगो तक पहुंचाएगी। उस थाली में वह सभी सामग्री रहेगी जो भगवान गणेश को अतिप्रिय है। सभी भगवानों को कुछ ना कुछ प्रिय होता है, जैसे भगवान शिव को भांग माँ दुर्गा को लाल फूल उसी प्रकार भगवान गणपति को दूर्वा और गेदें का फूल अधिक पसंद है। पूजा के लिए मिट्टी की ही मूर्ति लेनी चाहिए। कुछ लोग धातु की मूर्ति का प्रयोग करते हैं कि उचित नहीं है इसलिए धातु की मूर्ति का प्रयोग न करें। 
वैसे तो लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान गणेश को अलग अलग तरह से प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं लेकिन पर्यावरण को ध्यान मे रखते हुए प्रतिमा बनाने वाले कलाकारों ने इको फ्रेंडली मूर्ती बनाने की ठानी है।
इन मूर्तियों की सबसे खास बात ये है कि इनके अंदर पौधे का एक बीज रखा गया है। गणपति उत्सव का समापन होने के बाद उस मूर्ती को अपने घर में किसी पौधे के साथ रखे और नियमित रूप से उस पर जल चढ़ाते रहे तो कुछ दिनो मे वो मूर्ति मिट्टी के साथ मिल जाती है और उसमे से एक नया पौधा निकल आता है जो हमारे पर्यावरण को दूषित होने से बचाने में मदद करेगा। तो हो जाएं तैयार इस 13 सितम्बर को भगवान गणपति को प्रसन्न करने के लिए।
 

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