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CM योगी की सारी चेतावनी बेअसर, फिर डूबा वरुणा कॉरीडोर, प्रवासी सम्मेलन से पहले लगा झटका

CM योगी की सारी चेतावनी बेअसर, फिर डूबा वरुणा कॉरीडोर, प्रवासी सम्मेलन से पहले लगा झटका
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Publish Date:05 September 2018 04:00 PM

वाराणसी। प्रदेश की सरकार किसी योजना के आगे फेल हो जाती है तो वह वरुणा कॉरीडोर है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने योजना को जल्द पूर्ण नहीं होने पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही थी लेकिन आज यह हालात हो गये हैं कि वरुणा में आयी बाढ़ के चलते वरुणा कॉरीडोर का बड़ा हिस्सा डूब गया है। इसके चलते सरकार को प्रवासी सम्मेलन से पहले बड़ा झटका लगा है। गंगा का जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है जिसके चलते वरुणा का पानी भी उफान मारने लगा है। वरुणा कॉरीडोर का एक बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया है जबकि बचे हुए भाग भी जल बढ़ोतरी होने पर पानी में समा सकता है। वरुणापुल में जहां पर वरुणा नदी में अतिक्रमण किया गया है वहां का हिस्सा भी डूब चुका है। सबसे खराब स्थिति चैकाघाट पुलिस के पास है जहां पर बड़ा हिस्सा पानी में समा चुका है। यहां पर अभी काम भी पूरा नहीं हुआ था कि बाढ़ का पानी करोड़ों रुपये बहा ले गया। वरुणा में सीवर जल गिरने से रोकने के लिए पाइप डाली गयी है, जिसमे बाढ़ के चलते मिट्टी भर गयी होगी। ऐसा होने पर प्रोजेक्ट को बड़ा नुकसान होगा। जिस तरह से वरुणा के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि बचा हुआ हिस्सा में बाढ़ की चपेट में आ जायेगा। वरुणा कॉरीडोर के डूबने से सरकार पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अतिक्रमणकारियों को बचाने में जुटी प्रदेश सरकार अब वरुणा कॉरीडोर का नाम तक नहीं लेती है।
सपा सरकार के समय निर्माणाधीन मंडुआडीह आरओबी व सामनेघाट पुल को सीएम योगी सरकार ने तैयार करवा दिया। बीजेपी पर सपा की योजना अपने नाम करने का भी आरोप लगा था लेकिन वरुणा कॉरीडोर की बात आयी तो सरकार ने चुप्पी साध ली। आश्चर्य की बात है कि यूपी में नयी सरकार बनते ही सीएम योगी, नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना से लेकर बनारस के मंत्री तक वरुणा कॉरीडोर पर कार्रवाई की चेतावनी देते नहीं थकते थे लेकिन अचानक ऐसा क्या हो गया कि अब तो कोई भी वरुणा कॉरीडोर का नाम नहीं लेता है। यूपी सरकार को वरुणा कॉरीडोर पर अतिक्रमण करने वालों की इतनी चिंता थी कि कार्रवाई करने वाले वीडीए के तत्कालीन वीसी पुलकित खरे तक का तबादला कर दिया गया। पीएम नरेन्द्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र बनारस में जनवरी में प्रवासी सम्मेलन का आयोजन किया है। इस सम्मेलन में आने वाले लोगों के लिए वरुणा कॉरीडोर भी भ्रमण का स्थान बन सकता है लेकिन बाढ़ के पानी ने एक बार फिर वरुणा कॉरीडोर पर पानी फेर दिया है।
सपा सरकार में मार्च 2016 में वरुणा कॉरीडोर प्रोजेक्ट शुरू हुआ था। 201.65 करोड़ रुपये से भीमनगर के पास से आदिकेशव घाट तक कुल 10.03 किलोमीटर तक पाथवे, रेलिंग, पांच घाट, रंगीन लाइट आदि बनने थे। प्रोजेक्ट को दिसम्बर 2016 में पूरा होना था। इसके बाद फरवरी 2017 तक प्रोजेक्ट पूरा करने की अवधि बढ़ायी गयी थी। इसके बाद मार्च 2018 तक काम पूरा करने को कहा गया था लेकिन अभी तक वरुणा कॉरीडोर तैयार नहीं हो पाया है। सपा सरकार पर आरोप लगाने वाली बीजेपी अब खुद वरुणा कॉरीडोर के मुद्दे पर फंसती जा रही है।
 

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