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मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद पहली बार मगहर में आ रहे योगी

मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद पहली बार मगहर में आ रहे योगी
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Publish Date:21 May 2018 12:23 PM

महान सूफी संत और समाज सुधारक कबीर की निवाज़्ण स्थली मगहर को खलीलाबाद से जोड़ने वाली मुगलकालीन सुरंग अपने जीणोज़्द्धार के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन की प्रतीक्षा कर रहा है। मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद पहली बार मगहर में 21 मई को आ रहे योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम के साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर लोगों में आस जगी है। 
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जम्मू कश्मीर के जोजिला सुरंग की आधारशिला रखते हुए कहा कि यह सुरंग पर्यटन को बढ़ावा देगा और लोगों को रोजगार मिलेगा लेकिन मगहर में स्थित महान सूफी संत एवं ढाई आखर प्रेम के उपासक कबीर साहेब की निर्वाणस्थली को जोडऩे वाली लगभग आठ किमी लंबी खलीलाबाद से मगहर को जोडऩे वाली मुगल कालीन सुरंग के जीणोज़्द्धार की परियोजना चार साल से अधिक समय से उत्तर प्रदेश सरकार के पास लंबित है और ठंडे बस्ते में पड़ी है। 
इस परियोजना में न सिर्फ सुरंग के संरक्षण व जीर्णोद्धार की योजना है बल्कि मगहर स्थित महान सूफी संत कबीर साहेब की बुरी तरह क्षतिग्रस्त समाधि, मजार और गुफा के संरक्षण व जीर्णोद्धार की भी योजना शामिल है। कबीर की समाधि, मजार और उनकी एकांत साधना के लिए सदियों पुरानी गुफा जीर्ण शीर्ण हो चुकी है। जिससे इन इमारतों के अस्तित्व को खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही खलीलाबाद से मगहर तक जाने वाली मुगल कालीन सुरंग अपना अस्तित्व लगभग खो चुकी है। 
संतकबीरनगर कण्डोई ने बातचीत में बताया कि सुरंग के संरक्षण और विकास से संतकबीरनगर ही नहीं बल्कि पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था को पंख लग जाएगा और रोजगार की अपार संभावनाएं भी बनेंगी।  उन्होंने बताया कि‘इण्टेक’ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने में धरोहरों की स्थापत्य कला में बिना छेड़छाड़ किए ही अत्याधुनिक तकनीक से उनका संरक्षण और विकास करता है जिससे उसकी ऐतिहासिकता प्रभावित न हो। इण्टेक परियोजना फिर अमल कराने का लगातार प्रयास कर रहा है।  
कण्डोई ने उम्मीद जताई कि प्रदेश के मुख्यमंत्री पूर्वांचल से हैं और कबीर निर्वाणस्थली के महत्व से पूर्ण परिचित हैं इसलिए यह आशा करनी चाहिए कि इस ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण और विकास होगा। कण्डोई ने यह भी कहा कि जब तक समग्र रूप से कबीर से जुड़े स्थलों/भवनों व गुफा आदि का संरक्षण व विकास नहीं होता तब तक कबीर निर्वाणस्थली के सुंदरीकरण का कोई सार्थक परिणाम नहीं निकलेगा।
 

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